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No dalit unity -Hindi


~~ क्या होना चाहिये? ~~~page-1(13) # किसीसे लाइक या शेअर ऐसे कुछ पानेकी अपेक्षा बिलकुल न रखते हुये, नया कुछ देना ही चाहता ही आ रहा हुं. जो हमे कह्ना है वह बहूत सारा सबसे पहले हम ही कह चुके है, जो बादमे फुरसतसे एक एक करके कोई ना कोई दोहराता दिखाई भी देता है. आनंदही होता है, इस तरह मेरे ही विचारोंको फैलते हुए देख कर, और विचारोंकि ऐसी आदान प्रदान को देख कर. दर्द इस बात का है की, जब मै खुद सारे बालकोंको भी फ्रेण्ड रिक्वेस्ट भेज कर सभी एक दुसरोंके साथ कमसे कम इस नेट के मंच पर तो एक दिखे ऐसी कोशिस करता रहा हुं, तब हमारे अपनेही एक दुसरोसे अपनी अपनी जाती का डिंग मारते परहेज करते दिखते है. कब बन्द करेगे हम यह सब नादानिया ? वहा वो नौटंकि अमित शहा और मोदि तो १० करोड सभासद का झूठा हि सही, लेकिन दावा करके, उनके इंटरनेट के किडोंकि मददसे उसे सचमे डीजीटली तबदील करके बेशर्मिसे दुनिया भर उसकी डिंग मारते फिरते दिखते है. क्या उन पाखंडी और मतलबी किडोंसे हम दिलदार, जानदार और इमानदार लोग कोई धन दौलत के मतलब के लिये जुडने कि कोशिस कर रहे है या हमारे उपर हो रहे अत्याचार और अन्याय के खिलाफ जंग लडने के लिये एक होने कि गुहार लगा रहे है? अब तो बम्मनोंकेहि फुसलानेसे और उनकी बुद्धी और इशारोंसे हि, यह सारे गैर बम्मन बुद्दू अटरोसिटी एकट भी रद्द करनेके पिछे पडे है. यह बम्मनोंके पैर धुले पानी को पवित्र मानकर और हजार सालोंसे उसे पिकर उल्लू बने बुद्दु गैर अछूत और गैर बम्मन हिंदू, उनके अपनेहि शाहू महाराज, महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकरजी के अनुयायी बनकर हिंदू मनुस्मृती जलाने वाले, नव विचार स्वीकारने वाले मराठी साहित्य संमेलन के अध्यक्ष श्री श्रीमाल सबनीस व बुध्द धरम अपनाये प्रसिद्ध गजलकार सुरेश भट जैसे बम्मनोंको स्वीकारने के बजाय अभी भी तिलक, सावरकर, गोळवलकर जैसे कर्मठ बम्मन और अन्य उल्लुओन्मेसे खाली तोते के पद तक हि पदोन्नती पानेवाले मोदि जैसे तोते हि करिबी और आदर्श मानते है.

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